हिलती दीवारे अब नींव पे असर डालने लगी है,
नफरत की आग हर किसी को उबालने लगी है.
सिर लिये हाथ में फिरते देश भक्त वीर जवान,
पर अब शेरनियां लोमड़ी से बच्चे पालने लगी है.
मेरे भारत देश की नही किसी को चिन्ता फिकर,
नेता जुंडलियां सिर्फ अपना घर सम्भालने लगी है.
उठो भारत वासियों कही हो न जाये बहुत विलम्ब,
मुसीबतें अब हवा में पत्थरों को उछालने लगी है...."रैना"