वक़्त करता है शरारत मुझसे,
दिल पे लगे जख्म कुरेदता रहता। रैना"
मैंने तो न मांगता मखमली गद्दे तुझसे,
सोने के लिए थोड़ी सी जमीं दे दे। "रैना"
लक्ष्मी जी दिवाली के दिन जरूर आ जाना,
मुद्दत से मुफ़्लिसी ने मेरे घर डेरा लगा रखा है। रैना"
अब वफ़ा का मोल नही,
हर कोई शक की नजर से देखता है। रैना"
मंदिर में भी अब बैठने को जगह नही मिलती,
पुजारी भी पैसे वाले को ही बैठने को कहता है। रैना"
दिल पे लगे जख्म कुरेदता रहता। रैना"
मैंने तो न मांगता मखमली गद्दे तुझसे,
सोने के लिए थोड़ी सी जमीं दे दे। "रैना"
लक्ष्मी जी दिवाली के दिन जरूर आ जाना,
मुद्दत से मुफ़्लिसी ने मेरे घर डेरा लगा रखा है। रैना"
अब वफ़ा का मोल नही,
हर कोई शक की नजर से देखता है। रैना"
मंदिर में भी अब बैठने को जगह नही मिलती,
पुजारी भी पैसे वाले को ही बैठने को कहता है। रैना"
No comments:
Post a Comment