हाथों पे हाथ रख के बैठा है कुछ शर्म करले,
गर शान से जीना है तो तू कुछ कर्म करले।
सूखे पेड़ तो अक्सर जलाने के काम आये,
हरी टहनी के मान्नीद खुद को नरम करले।
तू ऊंचे मंदिरों में चढ़वा चढ़ाने के बजाय,
मुफ़्लिस की सेवा करने का धरम करले। रैना"
तेरे दिल के घर में रहना है,
तू कितना किराया लेना है।रैना"
गर शान से जीना है तो तू कुछ कर्म करले।
सूखे पेड़ तो अक्सर जलाने के काम आये,
हरी टहनी के मान्नीद खुद को नरम करले।
तू ऊंचे मंदिरों में चढ़वा चढ़ाने के बजाय,
मुफ़्लिस की सेवा करने का धरम करले। रैना"
तेरे दिल के घर में रहना है,
तू कितना किराया लेना है।रैना"
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