अहसास उसको ही होता है,
जिसने जिंदगी को देखा है।
मां बाप का दुःख क्या जाने,
वो लाड़ला बिगड़ा बेटा है।
गर आदमी खफा फिर क्या,
देने वाला तो सुख ही देता है।
सबकुछ दिया मगर सब्र नही,
रैना" फिर भी अक्सर रोता है। रैना"
जिसने जिंदगी को देखा है।
मां बाप का दुःख क्या जाने,
वो लाड़ला बिगड़ा बेटा है।
गर आदमी खफा फिर क्या,
देने वाला तो सुख ही देता है।
सबकुछ दिया मगर सब्र नही,
रैना" फिर भी अक्सर रोता है। रैना"