Monday, September 30, 2013

mujhe rang bdlna

हमें रंग बदलना नही आता इसलिए पीछे रह गये हैं,
हवा के संग चलना नही आता इसलिए पीछे रह गये हैं। राजेन्द्र रैना गुमनाम 
धरती ओ आसमान है,
मां ही मेरा भगवान है। 
मैं अनपढ़ हूँ अज्ञानी,
इतना ही मुझे ज्ञान है। 
मां ही मेरा  …… 
दिखलाया उजाला मुझको,
प्रेम प्यार से पाला मुझको,
खिलाया निवाला मुझको, 
गिरने से सम्भाला मुझको,
कदम कदम पे रखा ध्यान है। 
मां ही मेरा  ……
भोली सी प्यारी सूरत है, 
मेरी मां देवी की मूरत है,
साथ मेरे मेरी बीवी बच्चे,
पर मां ही मेरी जरूरत है,
मां की बदौलत बनी पहचान है। 
मां ही मेरा  ……राजेन्द्र रैना गुमनाम"
सुप्रभात जी   …… जय जय मां  

रैना के तीर

जुबानी जंग शुरू हो गई हवाई किले बनाने लगे हैं,
वोट के ठेकेदार जनता को फिर से बहकाने लगे हैं।
जो चट कर गये देश का मान सम्मान इज्जत आबरू,
देखो अब तो वो भी खुद को पाक साफ बताने लगे हैं।
राहुल गांधी ने प्रधानमन्त्री की हालत बिगाड़ के रख दी,
फिर भी चिपू चम्मचे राहुल गांधी को चमकाने लगे हैं।
राजनीती का खेल देखिये सोनिया भक्त लालू जेल में,
क्योकि अब कांग्रेसी नितीश के साथ नैना लड़ाने लगे हैं।
राजनीती में कोई स्थाई दोस्त दुश्मन होता ही नही है,
अडवानी को अब मोदी कुछ कुछ पसंद आने लगे हैं।  राजेन्द्र रैना 
प्यार से पढ़ना दोस्तों

मेरे जैसे तुम तड़फ़ोगे,
बादल से छम छम बरसोगे,
तरसे मोरे नैना प्यासे,
तुम भी मिलने को तरसोगे। राजेन्द्र रैना"

मेरे दिल से गर खेलो गे,
फिर तो दुःख तुम भी झेलो गे,
 मेरे खातिर बंद दरवाजे,
"रैना"फिर तुम क्या ले लो गे। राजेन्द्र 'रैना"
  

Sunday, September 29, 2013

युवा दोस्तों की फरमाइश पर

मत पूछ तुझसे बिछुड़ के हम क्या करते है,
शिकवा न कोई भी गिला खुद से लड़ते है।
साथ तेरे ख़ुश थे हम अब मर मर के जीते है,
तब आखों की पीते थे अब बोतल की पीते है। राजेन्द्र रैना गुमनाम

मां एक ऐसा पेड़ है,
जो अपने बच्चों में ???
ताउम्र फल और छाया बांटता है,
चाहे  बच्चा कांटता छांट्ता है।    
आंधी तूफान को हंस के सहता,
चुप ही रहता कुछ न कहता,
अपने फर्ज में निरंतर लगा रहता।
मां के त्याग तपस्या पर ग्रन्थ लिखा जा सकता है,
अपना फर्ज कैसे अदा करते मां से सीखा जा सकता है। राजेन्द्र रैना गुमनाम" 
सुप्रभात जी दोस्तों  ……. जय जय मां। 

hansna aata hai

दोस्तों के नाम प्यार भरा पैगाम

हंसना आता है रोने के बाद ही,
हासिल होता कुछ खोने के बाद ही।
ऐसी आदत फितरत कोई क्या कहे,
जागे हम इन्सां सोने के बाद ही।
यादों की मेहरबानी गम में तड़फते, 
गम कम हो आँखें धोने के बाद ही।
सरकारी बाबू तो कहते शान से,
हम तो जागें कुछ होने के बाद ही।  
काली लम्बी "रैना" तन्हा काट ले,
पीया तो मिलना गौने के बाद ही।राजेन्द्र रैना गुमनाम"

Saturday, September 28, 2013

ab andhe hai najar


शहीदे आजम भगत सिंह के शान में 

भगत सिंह चैन से तू कब सो रहा होगा,
देश की हालत देख फूट फूट रो रहा होगा। 
तू देखता हर कोई खुद को ही करता तृप्त है,
देश का मसीहा ही अब भ्रष्टाचार में लिप्त है। 
देश भक्ति का तो बेवजह मचा हुआ शोर है,
अब यहाँ हर किसी की कुर्सी तक ही दौड़ है। 
अफ़सोस देश का हर तीसरा मसीहा दागी है,
अब काले अंग्रेजों के हाथ में देश की चाबी है।
भगत सिंह जी साथियों सहित लौट के आओ,
भारत माँ को काले अंग्रेजों से मुक्त करवाओ।राजेन्द्र रैना गुमनाम" 

Friday, September 27, 2013

सुबह का गीत अभी सुबह नही मिलेगे 

दीवारे गिरा दो,ये पहरे हटा दो,
अब दूरी न होगी,ये दूरी मिटा दो। 

दीप जलाओ,अंधकार मिटाओ,  
बिछुड़ हुए सब को मिला दो। 
यही है इबादत ……. 
ये बंधन मिटा दो,ये पिंजरे उठा दो,
कैद पंछियों को खुले में उड़ा दो। 
यही है इबादत ---------
ढोंग ये छोडो,दिल दिल से जोड़ो,
मन अपने को मंदिर बना दो। 
यही है इबादत-------
रोते को हंसयो,गिरते को उठाओ,
प्रेम मोहब्बत की गंगा बहा दो। 
यही है इबादत--------
रैना"करता देरी,गिर जाये गी ढेरी,
मन उसके चरणों में लगा दो। 
यही है इबादत …      राजेन्द्र रैना"
सुप्रभात जी   जय जय मां 

rahul baba hai bda bhola

राहुल बाबा है बड़ा भोला,
दूसरे कहते तो छोड़े गोला।गुमनाम 




काश कोई बहाना बन जाये, 
प्यार का इक फसाना बन जाये,
देखते रात दिन हम इक सपना,
जिन्दगी इक तराना बन जाये।  
इक तेरे मुस्कराने से यारा,
खूब मौसम सुहाना बन जाये।
इक यही तो तमन्ना है अपनी,
दिल नजर का निशाना बन जाये।
अर्ज सुन ले कर्म कर दे मौला, 
रहम कर दे ठिकाना बन जाये।
समझ बख्शे वही मेहर करता,   
रैन" कैसे सयाना बन जाये।  राजेन्द्र रैना"गुमनाम" 

Thursday, September 26, 2013

tute dil se friyad

टूटे दिल से फरियाद करके,
हम रोते तुझको याद करके।
दर्दो गम पीड़ा बहुत होती,
उसने लूटा आबाद करके।
शिकवा माली से ये हमें है,
गुलशन छोड़ा बरबाद करके।
यूँ गम से मरते लोग अब तो,
"रैना"रखना दिलशाद करके। "राजेन्द्र रैना"
इक ग़ज़ल 

प्यार से मांगी दुआ जैसे,
यार तो होते खुदा जैसे,
यार के अन्दाज कुछ ऐसे,  
मस्त बहकी सी फिजा जैसे.
बेवफा भी कुछ निकलते है,
यार वो है बददुआ जैसे.
रैन को शिकवा न कोई भी,
यार अपने तो दवा जैसे.............राजेन्द्र "रैना"गुमनाम 
सुप्रभात जी। …। जय जय मां