सुबह का गीत अभी सुबह नही मिलेगे
दीवारे गिरा दो,ये पहरे हटा दो,
अब दूरी न होगी,ये दूरी मिटा दो।
दीप जलाओ,अंधकार मिटाओ,
बिछुड़ हुए सब को मिला दो।
यही है इबादत …….
ये बंधन मिटा दो,ये पिंजरे उठा दो,
कैद पंछियों को खुले में उड़ा दो।
यही है इबादत ---------
ढोंग ये छोडो,दिल दिल से जोड़ो,
मन अपने को मंदिर बना दो।
यही है इबादत-------
रोते को हंसयो,गिरते को उठाओ,
प्रेम मोहब्बत की गंगा बहा दो।
यही है इबादत--------
रैना"करता देरी,गिर जाये गी ढेरी,
मन उसके चरणों में लगा दो।
यही है इबादत … राजेन्द्र रैना"
सुप्रभात जी जय जय मां