Sunday, September 29, 2013

मां एक ऐसा पेड़ है,
जो अपने बच्चों में ???
ताउम्र फल और छाया बांटता है,
चाहे  बच्चा कांटता छांट्ता है।    
आंधी तूफान को हंस के सहता,
चुप ही रहता कुछ न कहता,
अपने फर्ज में निरंतर लगा रहता।
मां के त्याग तपस्या पर ग्रन्थ लिखा जा सकता है,
अपना फर्ज कैसे अदा करते मां से सीखा जा सकता है। राजेन्द्र रैना गुमनाम" 
सुप्रभात जी दोस्तों  ……. जय जय मां। 

No comments:

Post a Comment