इक ग़ज़ल
प्यार से मांगी दुआ जैसे,
प्यार से मांगी दुआ जैसे,
यार तो होते खुदा जैसे,
यार के अन्दाज कुछ ऐसे,
मस्त बहकी सी फिजा जैसे.
बेवफा भी कुछ निकलते है,
यार वो है बददुआ जैसे.
रैन को शिकवा न कोई भी,
यार अपने तो दवा जैसे.............राजेन्द्र "रैना"गुमनाम
सुप्रभात जी। …। जय जय मां
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