Friday, September 27, 2013


काश कोई बहाना बन जाये, 
प्यार का इक फसाना बन जाये,
देखते रात दिन हम इक सपना,
जिन्दगी इक तराना बन जाये।  
इक तेरे मुस्कराने से यारा,
खूब मौसम सुहाना बन जाये।
इक यही तो तमन्ना है अपनी,
दिल नजर का निशाना बन जाये।
अर्ज सुन ले कर्म कर दे मौला, 
रहम कर दे ठिकाना बन जाये।
समझ बख्शे वही मेहर करता,   
रैन" कैसे सयाना बन जाये।  राजेन्द्र रैना"गुमनाम" 

No comments:

Post a Comment