तेरी प्यारी सी सूरत दिखा दे,
Thursday, June 30, 2016
Wednesday, June 29, 2016
Tuesday, June 28, 2016
दोस्तों के लिए कुछ ख़ास
तुझे मिलने की हसरत जवां है,
बता हमदम तू रहता कहां है।
हमें कुछ भी समझ में न आये,
कहे कोई यहां वो वहां है।
तेरे जलवें हसीं खूब लगते,
खिले फूलों में ख़ुश्बू रवां है।
मुझे एहसास होता यही अब,
मेरे दिल में तू रहता यहां है।
मजे शैतान करता यहां अब,
दुखी बेहाल अब तो इंसां है।
कटे जैसी कटो जिन्दगी अब,
बता रैना"दुखी क्यों हैरां है। रैना"
तुझे मिलने की हसरत जवां है,
बता हमदम तू रहता कहां है।
हमें कुछ भी समझ में न आये,
कहे कोई यहां वो वहां है।
तेरे जलवें हसीं खूब लगते,
खिले फूलों में ख़ुश्बू रवां है।
मुझे एहसास होता यही अब,
मेरे दिल में तू रहता यहां है।
मजे शैतान करता यहां अब,
दुखी बेहाल अब तो इंसां है।
कटे जैसी कटो जिन्दगी अब,
बता रैना"दुखी क्यों हैरां है। रैना"
Monday, June 27, 2016
Thursday, June 16, 2016
वैष्णो माँ की जय जय जय
विनती करो स्वीकार एक बार एक बार,
तेरा करना दीदार एक बार एक बार।
बाहर आओ माँ मेरी पर्दे से,
करो सपना साकार एक बार एक बार।
मुद्द्त से नैना मेरे प्यासे हैं,
खत्म करो इन्तजार एक बार एक बार।
तेरे भक्त दीवानें मुश्किल में,
सुन ले करुणा पुकार एक बार एक बार।
वीरां गुलशन में बहार आये,
गर माँ मिले तेरा प्यार एक बार एक बार।
राहगीर जन्मों से भटक रहे,
कर दो माँ भव से पार एक बार एक बार।
रैना"को रहती है दिन तलब,
नैना कर लो माँ चार एक बार एक बार। रैना"
सुप्रभात जी --------------------जय जय माँ
विनती करो स्वीकार एक बार एक बार,
तेरा करना दीदार एक बार एक बार।
बाहर आओ माँ मेरी पर्दे से,
करो सपना साकार एक बार एक बार।
मुद्द्त से नैना मेरे प्यासे हैं,
खत्म करो इन्तजार एक बार एक बार।
तेरे भक्त दीवानें मुश्किल में,
सुन ले करुणा पुकार एक बार एक बार।
वीरां गुलशन में बहार आये,
गर माँ मिले तेरा प्यार एक बार एक बार।
राहगीर जन्मों से भटक रहे,
कर दो माँ भव से पार एक बार एक बार।
रैना"को रहती है दिन तलब,
नैना कर लो माँ चार एक बार एक बार। रैना"
सुप्रभात जी --------------------जय जय माँ
Tuesday, June 14, 2016
आंसू हुये मोती बहाया न करो,
हर बात को दिल पे लगाया न करो।
फ़ितरत हुई ऐसी नमक डाल सभी,
ये जख्म दिल के यूं दिखाया न करो।
गर ठान ले मन्जिल मिले शक न करें,
अपने मनोबल को गिराया न करो।
कर कर्म अपना है नसीबा भी यही,
यूं देख उसको दिल जलाया न करो।
हैं प्यार के भूखे कभी कुछ न कहे,
माँ बाप से नजरें चुराया न करो।
सब कुछ उसी का
रैना"
हर बात को दिल पे लगाया न करो।
फ़ितरत हुई ऐसी नमक डाल सभी,
ये जख्म दिल के यूं दिखाया न करो।
गर ठान ले मन्जिल मिले शक न करें,
अपने मनोबल को गिराया न करो।
कर कर्म अपना है नसीबा भी यही,
यूं देख उसको दिल जलाया न करो।
हैं प्यार के भूखे कभी कुछ न कहे,
माँ बाप से नजरें चुराया न करो।
सब कुछ उसी का
रैना"
Monday, June 6, 2016
दोस्तों देखना
तेरा शहर कुछ खास लगने लगा है,
जो दूर था वो पास लगने लगा है।
अब हो रहा एहसास कुछ बेहतर ही,
खुद पे हुआ विश्वास लगने लगा है।
अरमान दीवानें सजे कुछ अलग ही,
दिल में तेरा प्रवास लगने लगा है।
इन्सान की हालत हुई आज बदतर,
खुद का उड़ा उपहास लगने लगा है।
फिर दुष्ट बढ़ते जा रहे संत दुखी हैं,
हो राम को बनवास लगने लगा है।
रैना"मंजिल ऐसे न मिलती कभी भी,
करना पड़े प्रयास लगने लगा है। रैना"
तेरा शहर कुछ खास लगने लगा है,
जो दूर था वो पास लगने लगा है।
अब हो रहा एहसास कुछ बेहतर ही,
खुद पे हुआ विश्वास लगने लगा है।
अरमान दीवानें सजे कुछ अलग ही,
दिल में तेरा प्रवास लगने लगा है।
इन्सान की हालत हुई आज बदतर,
खुद का उड़ा उपहास लगने लगा है।
फिर दुष्ट बढ़ते जा रहे संत दुखी हैं,
हो राम को बनवास लगने लगा है।
रैना"मंजिल ऐसे न मिलती कभी भी,
करना पड़े प्रयास लगने लगा है। रैना"
Sunday, June 5, 2016
Saturday, June 4, 2016
Thursday, June 2, 2016
1
सारा शहर क्यों अब परेशां सा लगे,
देखो जिसे बेताब हैरां सा लगे।
गमगीन है इन्सां डरा सहमा हुआ,
जख्मी मुसाफिर आज बेजां सा लगे।
मत छेड़ आंसू आंख से बहने लगे,
दिल में दबा ये दर्द तूफां सा लगे।
है ये अजब तेरी अदा क्या खूब सी,
जिसको नहीं देखा कभी जां सा लगे।
देगा गवाही कौन अब सच पूछता,
अब झूठ रैना" बोलना आसां सा लगे। रैना"
हमने तुझे दिल में बसाया है,
तूने मगर हमको भुलाया है।
है सादगी तेरी कहर ढाये,
मुस्कान ने दिल को जलाया है।
दिन रात है इंतज़ार तेरा ही,
क्यों ख्वाब में आ के सताया है।
आबाद गुलशन हम करें लेकिन,
उस बागवां को ये सब न भाया है।
क्यों हंस रहे हैं लोग अब इतना,
उसने मुसाफिर को गिराया है।
फुरसत मिले तो सोचना ढंग से,
रैना"यहां किस काम आया है। रैना"
तूने मगर हमको भुलाया है।
है सादगी तेरी कहर ढाये,
मुस्कान ने दिल को जलाया है।
दिन रात है इंतज़ार तेरा ही,
क्यों ख्वाब में आ के सताया है।
आबाद गुलशन हम करें लेकिन,
उस बागवां को ये सब न भाया है।
क्यों हंस रहे हैं लोग अब इतना,
उसने मुसाफिर को गिराया है।
फुरसत मिले तो सोचना ढंग से,
रैना"यहां किस काम आया है। रैना"
Wednesday, June 1, 2016
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