दोस्तों देखना
तेरा शहर कुछ खास लगने लगा है,
जो दूर था वो पास लगने लगा है।
अब हो रहा एहसास कुछ बेहतर ही,
खुद पे हुआ विश्वास लगने लगा है।
अरमान दीवानें सजे कुछ अलग ही,
दिल में तेरा प्रवास लगने लगा है।
इन्सान की हालत हुई आज बदतर,
खुद का उड़ा उपहास लगने लगा है।
फिर दुष्ट बढ़ते जा रहे संत दुखी हैं,
हो राम को बनवास लगने लगा है।
रैना"मंजिल ऐसे न मिलती कभी भी,
करना पड़े प्रयास लगने लगा है। रैना"
तेरा शहर कुछ खास लगने लगा है,
जो दूर था वो पास लगने लगा है।
अब हो रहा एहसास कुछ बेहतर ही,
खुद पे हुआ विश्वास लगने लगा है।
अरमान दीवानें सजे कुछ अलग ही,
दिल में तेरा प्रवास लगने लगा है।
इन्सान की हालत हुई आज बदतर,
खुद का उड़ा उपहास लगने लगा है।
फिर दुष्ट बढ़ते जा रहे संत दुखी हैं,
हो राम को बनवास लगने लगा है।
रैना"मंजिल ऐसे न मिलती कभी भी,
करना पड़े प्रयास लगने लगा है। रैना"
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