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सारा शहर क्यों अब परेशां सा लगे,
देखो जिसे बेताब हैरां सा लगे।
गमगीन है इन्सां डरा सहमा हुआ,
जख्मी मुसाफिर आज बेजां सा लगे।
मत छेड़ आंसू आंख से बहने लगे,
दिल में दबा ये दर्द तूफां सा लगे।
है ये अजब तेरी अदा क्या खूब सी,
जिसको नहीं देखा कभी जां सा लगे।
देगा गवाही कौन अब सच पूछता,
अब झूठ रैना" बोलना आसां सा लगे। रैना"
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