मझदार नही साहिल देखते है,
रास्ता नही मंजिल देखते है,
हम धुन के पक्के चलते रहते,
मौसम को बुझदिल देखते है। रैना"
अधिकतर कलम के सिपाही?????
अब सो गये है,
जागते पूंछ हिलाने के लिये?????
ख़िताब पाने के लिये।रैना"
रास्ता नही मंजिल देखते है,
हम धुन के पक्के चलते रहते,
मौसम को बुझदिल देखते है। रैना"
अधिकतर कलम के सिपाही?????
अब सो गये है,
जागते पूंछ हिलाने के लिये?????
ख़िताब पाने के लिये।रैना"
No comments:
Post a Comment