तुम दिन रात यूं भागते क्यों हो,
हरपल परेशान जागते क्यों हो।
यहां कोई किसी को कुछ न देता,
भिखारी से भीख मांगते क्यों हो।रैना"
इक तुम ही नही मसरूफ़ जमाने में,
हमें भी सिर खुजाने की फुरसत नही। रैना"
मसरूफ=बिजी,व्यस्त
वो कोशिश करने की बात तो करते है मगर,
अफ़सोस बात को अमली जामाँ नही पहनाते। रैना"
तेरे घर का रस्ता जब मिलता,
रैना"मन का गुल तो तब खिलता। रैना"
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