खिला फूल चमकता सितारा है,
तेरा हर अंदाज अलग न्यारा है,
हर अदा है तारीफ के काबिल,
बेशक हर मौज का किनारा है।
मुमकिन नही तुझे भूल पाना,
अहसास मुझे मेरा सहारा है,
अर्ज गुजारिश हटा दे चिलमन ,
देखना वो दिलकश नजारा है।
सजधज के चले है घर अपने,
यू मुफ्लिशि में जीवन गुजारा है।
रैना" गैरों से गिला नही करता,
उसको तो अपनों ने मारा है। रैना"
लौट आये फिर अपने शहर में,
भटके बहुत फिर भी कुछ हासिल न हुआ। रैना"
काश जिन्दगी से मुलाकात होती,
हुस्न के चर्चे इश्क की बात होती,
फिर तो मंजर और हसीं हो जाता,
रैना"जो सावन की बरसात होती। रैना"
इन्सान को भगवान मत समझो,
इंसान तो गिरगट के जैसे रंग बदलता है। रैना"