दर्द जिसके हिस्से आता है,
वो तप के निखर जाता है,
ये सच है झूठ नही "रैना"
जो खोता है वो ही पाता है। रैना"
मेरे ख्वाबों ख्यालों पे देते हो पहरा,
आखिर मेरा तझसे क्या रिश्ता है। रैना"
मुरझाये चेहरे पे "रैना"अब जमाल नही आता,
ऐसा कोई पल नही जब तेरा ख्याल नही आता। रैना"
काश हम शब्द कुंज होते,
फिर लिख लेते जीवन गाथा विस्तार से। रैना"
वो तप के निखर जाता है,
ये सच है झूठ नही "रैना"
जो खोता है वो ही पाता है। रैना"
मेरे ख्वाबों ख्यालों पे देते हो पहरा,
आखिर मेरा तझसे क्या रिश्ता है। रैना"
मुरझाये चेहरे पे "रैना"अब जमाल नही आता,
ऐसा कोई पल नही जब तेरा ख्याल नही आता। रैना"
काश हम शब्द कुंज होते,
फिर लिख लेते जीवन गाथा विस्तार से। रैना"
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