Sunday, December 28, 2014

wada kiya magr nibhaya

वादा किया मगर निभाया न गया,
भटकने से मन को बचाया न गया,
सोते सोते गुजारी तमाम जिन्दगी,
गफ़लत में खुद को जगाया न गया। रैना"

पीना तो चाहते थे जामे चश्म ,
अफ़सोस पीने से पहले डूब गए। रैना

मेरी बीवी की दर्द भरी कहानी
फेसबुक से लगा ली आंखे,अपनी कोई कदर नही,
बेवफा ने चुरा ली आंखे ,अपनी कोई कदर नही।
जालिम मेरा पीया दीवाना फेसबुक का हो गया,
मुझसे उसने घुमा ली आंखे अपनी कोई कदर नही। रैना"

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