जिंदगी का क्या यू ही चलेगी,
कौन जाने कब शाम ढलेगी,
मस्ती में रहना सीख ले रैना"
दुनिया का क्या यू ही जलेगी। रैना"
जिंदगी की दौड़ में पीछे रहा गए है,
क्योंकि वैसे दौड़ना ही नही आता,
मौसम के मानिंद न बदले "रैना"
हाथ पकड़ के छोड़ना ही नही आता। रैना"
कौन जाने कब शाम ढलेगी,
मस्ती में रहना सीख ले रैना"
दुनिया का क्या यू ही जलेगी। रैना"
जिंदगी की दौड़ में पीछे रहा गए है,
क्योंकि वैसे दौड़ना ही नही आता,
मौसम के मानिंद न बदले "रैना"
हाथ पकड़ के छोड़ना ही नही आता। रैना"
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