महिला दिवस के पूर्व में ही रैना का कटु छक्का
भारत में मेहनतकश के मन की कली कभी न खिलती है,
गधे खाते देशी घी की पंजीरी घोड़ों को घास न मिलती है।
वैसे हर वर्ष बड़ी धूम से मनाया जाता महिला दिवस मगर,
अफ़सोस फिर भी नारी जलाई जाती अथवा दुखी हो जलती है। रैना"
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