दोस्तों बड़े दिनों बाद आप की
नजर एक रचना कर रहा हूं
अपनी राय से अवगत करवाये।
तुझको अपना बनाऊ कैसे,
तू नही चाहता मैं चाहु कैसे।
गम की आंधी चल रही फिर,
दीप आशा का जलाऊ कैसे।
तेरे घर की राह न जाने कोई,
तेरे घर फिर मैं आऊ कैसे।
तू अन्दर बैठा अहसास मुझे,
सीना चीर कर दिखाऊ कैसे।
गर मैं रोता फिर तोहीन तेरी,
पलकों से मोती टपकाऊ कैसे।
रैना"अनजान तू बता दे मुझे,
लुटते कारवां को बचाऊ कैसे।रैना"
नजर एक रचना कर रहा हूं
अपनी राय से अवगत करवाये।
तुझको अपना बनाऊ कैसे,
तू नही चाहता मैं चाहु कैसे।
गम की आंधी चल रही फिर,
दीप आशा का जलाऊ कैसे।
तेरे घर की राह न जाने कोई,
तेरे घर फिर मैं आऊ कैसे।
तू अन्दर बैठा अहसास मुझे,
सीना चीर कर दिखाऊ कैसे।
गर मैं रोता फिर तोहीन तेरी,
पलकों से मोती टपकाऊ कैसे।
रैना"अनजान तू बता दे मुझे,
लुटते कारवां को बचाऊ कैसे।रैना"
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