जिंदगी का सफर न आसान दोस्तों,
हर तरफ है लड़ाई घमासान दोस्तों।
अपने बेगाने का कोई जिक्र ही नही,
बीच चौराहे पे बिकता ईमान दोस्तों।
शराफत खा गई बदले दौर की बिल्ली,
जो फिर भी शरीफ बड़े नादान दोस्तों।
दीवारे कांच की दरवाजें न खिड़कियां,
बड़े लोगो के कुछ ऐसे मकान दोस्तों।
आज के इंसान की हालत देख रैना"
परेशान सा हो रहा है भगवान दोस्तों। रैना"
हर तरफ है लड़ाई घमासान दोस्तों।
अपने बेगाने का कोई जिक्र ही नही,
बीच चौराहे पे बिकता ईमान दोस्तों।
शराफत खा गई बदले दौर की बिल्ली,
जो फिर भी शरीफ बड़े नादान दोस्तों।
दीवारे कांच की दरवाजें न खिड़कियां,
बड़े लोगो के कुछ ऐसे मकान दोस्तों।
आज के इंसान की हालत देख रैना"
परेशान सा हो रहा है भगवान दोस्तों। रैना"
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