है नही अफ़सोस मैं बरबाद हो गया,
हर जुबां पे आजकल आबाद हो गया।
सिसकते अरमान आंसू बन के बह गये,
हादसा कुछ ही दिनों के बाद हो गया।
सोचता हूं बैठ कर आराम से कभी,
बेवफा पे क्यों भला दिलशाद हो गया।
हाल मेरा पूछते अनजान से बने,
जख्म जब है सूख कर बेराद हो गया।
दौर पैसे का चला बदहाल है शहर,
बज़्म में हर इक भला बेदाद हो गया।
दिल परेशां रैन का इक ही सवाल है,
बेसुरा सा क्यों भला ये नाद हो गया। रैना"
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