दोस्तों देखना कुछ इस कदर इबादत की है
बहुत कम है देश का दर्द समझने वाले,
बहुत ज्यादा गिरगट रंग बदलने वाले।
सदन में बैठ किस कद्र फरेब करे नेता,
दिखाने को एक दूसरे पर भड़कने वाले।
इस शहर में सीरत की कोई कद्र नही है,
ज्यादातर सूरत पे जान छिड़कने वाले।
तू इन्सानी बूतों से फरियाद मत करना,
पत्थर दिल हरगिज नही पिघलने वाले।
आजकल उनके बच्चें मोहताज़ हो जाते,
जो ईमानदार सच की राह पे चलने वाले।
कैद पिंजरे में परिन्दा तड़फे भूखा प्यासा,
रैना"उसे क्या खिलायेगे ये भटकने वाले। रैना"
सम्पर्क ---94160 76914
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