दोस्तों आप के लिए
अब भला कैसे वफ़ादारी सिखाये उनको,
तोड़ देगे आइना गर जो दिखाये उनको।
दौड़ती नफरत रगों में ही रिवायत ऐसी,
पाठ उल्फत का भला कैसे पढ़ाये उनको।
जो समझ सकते नही बातें मुहब्बत वाली,
लात घूसें ही बराबर से जमाये उनको।
जब लगे मौक़ा गिरा परदा उठाये झट से,
चेहरा कैसा लगे उनका दिखाये उनको।
जो खुदा की भी हिदायत को नही माने तो,
रास्ता तो नरक का ही फिर दिखाये उनको।
शाम जल्दी ही ढलेगी तू जरा सम्भल जा,
रैन" होने को हुई कोई बताये उनको। रैना"
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