कस्तूरी मृग के जैसे भटके इंसान है,
पर मन के अन्दर ही बैठे भगवान है। रैना"
आठों पहर करे मेरी मेरी,
दो पल ही कर तेरी तेरी,
कर ले सोच विचार तू बंदे,
ढह जानी ये मिट्टी की ढेरी। रैना"
सुबह होने का इंतजार है,
शाम ढलने का फ़िक्र नही,
जहां से आये जहां जाना है,
उसका कभी करते जिक्र नही।"रैना"
पर मन के अन्दर ही बैठे भगवान है। रैना"
आठों पहर करे मेरी मेरी,
दो पल ही कर तेरी तेरी,
कर ले सोच विचार तू बंदे,
ढह जानी ये मिट्टी की ढेरी। रैना"
सुबह होने का इंतजार है,
शाम ढलने का फ़िक्र नही,
जहां से आये जहां जाना है,
उसका कभी करते जिक्र नही।"रैना"
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