दोस्तों बाद मुद्दत आप की नजर इक ग़ज़ल
तुझसे मिलने की हसरत है,
पर तुझको तो कब फुरसत है।
तेरी बस्ती में लोगों की,
अब पागल जैसी हालत है।
अपना बन कर धोखा देना,
इन्सां की ऐसी फितरत है।
धोखेबाजों की चांदी है,
क्या ये भी तेरी कुदरत है।
अब रैना"हम भी सुधरेगे,
वरना आ जानी शामत है। रैना"
तुझसे मिलने की हसरत है,
पर तुझको तो कब फुरसत है।
तेरी बस्ती में लोगों की,
अब पागल जैसी हालत है।
अपना बन कर धोखा देना,
इन्सां की ऐसी फितरत है।
धोखेबाजों की चांदी है,
क्या ये भी तेरी कुदरत है।
अब रैना"हम भी सुधरेगे,
वरना आ जानी शामत है। रैना"
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