गर नशे में मखमूर न होता,
तो उनसे कभी दूर न होता.
फरिश्ते काटते न घर के चक्कर,
गर नज़रों का कसूर न होता.
इबादत करता सारा जमाना,
गर हसीनों में गरूर न होता.
आइना देखता न हसीं चेहरे,
तो टूट कर चकनाचूर न होता.
क्या गरज थी जहर पीने की,
गर मय में सरूर न होता.
गर मिल गेई होती मंजिल,
तो "रैना"इतना मशहूर न होता.
राजिंदर "रैना
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