Friday, June 18, 2010
बाढ़ का पानी
मै बाढ़ का पानी हूँ,अपनी राह खुद बना लुगा,
तन्हा चलना न मेरी फितरत, दो चार को साथ लगा लुगा.
मुझे गुमां न अपनी हस्ती का,बस हिम्मत पर भरोसा है,
क्या हुआ जो टूट गये सपने, टूटे सपने फिर सजा लुगा.
ये सच्च उजाले में भी तो,घना घोर अँधेरा होता है,
तिशनगी को मिटाने के लिए, मै दिल का दीप जला लुगा.
बड़ी उच्ची है परवाज मेरी, पर बातों पर यकीन नही,
तब खबर सभी को हो जाये,जब ख्वाबो का महल बना लुगा.
हाल अपने से मै बेखबर, औरो से मुझको क्या लेना,
इक बार तूं कर दे नजरे कर्म, तेरे कदमो में सर झुका लुगा.
अब चैन से मुझको रहने दे,क्यों डाले खलल मेरी मस्ती में,
आ बैठा इश्क की मंडी में, चार आन्ने मै भी कमा लुगा.
"रैना" को तलब है तेरी, तेरे दीद को तरस रही अखिया
इक बार मेरे घर आ जाओ,तुम्हे पलकों पर बैठा लुगा.
राजिंदर "रैना"
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