बेशक सारा ये शहर जला दो.
पर आशिको को कोई न सजा दो,
बिछुड़ गये जो सब को मिला दो.
यही है इबादत, यही है इबादत
मिली है मोहलत कर लो इबादत.
ये बंधन मिटा दो, ये पिंजरे उठा दो,
कैद पंछियों को खुले में उड़ा दो,
यही है इबादत --------------------
ढोंग ये छोडो, तार इक संग जोड़ो,
मन अपने को मंदिर बना दो.
यही है इबादत---------------------
रोते को हंसयो, गिरते को उठाओ,
प्रेम की रस भरी गंगा बहा दो.
यही है इबादत-----------------------
राजिंदर "रैना"
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