दिल कही ओर तो आंख कही ओर है.
तेरी बस्ती के लोग बेलगाम हो लिए,
अब किसी का किसी पर चलता न जोर है.
वादे कसमे टूटती दीन न इमान है,
दिन कही ओर तो रात कही ओर है.
हया अपने हाल पर आंसू है बहा रही,
बेहया सब हो लिए करता न कोई गोर है.
उसको तूं याद कर मिलने की फरियाद कर,
बेवजह "रैना" क्यों लगा रहा तूं दौड़ है.
nice one ............ sirji
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