Sunday, June 20, 2010

भारत माँ के

भारत माँ के सम्मान में निरंतर हो रहा घाटा,


इसी वजह से बहुत दुखी है,आजकल भारत माता.

इसी वजह से --------------------------

स्वार्थ के दलदल में दस्स गये,चाचा, ताऊ, ताई,

मतलब हो गया सब पर भारी,बहन न कोई भाई,

पैसे के आगे बौना पड़ गया हर एक रिश्ता नाता.

इसी वजह से --------------------------------

शिक्षा, दीक्षा, मान, मर्यादा भूल गये है सारी,

देश के रहनुमा भी है अब तो माँ से करे गद्दारी,

सभी हड़पने के चक्कर में जो हाथ किसी के आता.

इसी वजह से ---------------------------

दिन फिरे गे भारत माँ बैठी थी आस लगाये,

भावी पीढ़ी तो है अब नशे में धसती जाये,

सोच बेटो के बारे में माँ का दिल घबराता.

इसी वजह से ---------------------------------



खाना पूर्ति करने को कसमे सभी है खाते,

दाव लगे तो डीजल, पट्रोल, चारा हजम कर जाते,

हर कोई डाका डाल रहा न कोई भी फर्ज निभाता.

इसी वजह से ---------------

चोर उच्चके मौज उडाये मस्ती में डंड पेले,

ईमानदार और स्वाभिमानी लाखों दुखड़े झेले,

कलयुगी गुरु चेलो से तो त्रस्त हुआ विधाता.

राजिंदर "रैना"

2 comments:

  1. भारत माँ के सम्मान में निरंतर हो रहा घाटा,
    इसी वजह से बहुत दुखी है,आजकल भारत माता.
    desh chintan ki achhi rachna hai-isi tarah kalam chalate rahen aap.

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  2. Its heart touching and really good

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