भारत माँ के सम्मान में निरंतर हो रहा घाटा,
इसी वजह से बहुत दुखी है,आजकल भारत माता.
इसी वजह से --------------------------
स्वार्थ के दलदल में दस्स गये,चाचा, ताऊ, ताई,
मतलब हो गया सब पर भारी,बहन न कोई भाई,
पैसे के आगे बौना पड़ गया हर एक रिश्ता नाता.
इसी वजह से --------------------------------
शिक्षा, दीक्षा, मान, मर्यादा भूल गये है सारी,
देश के रहनुमा भी है अब तो माँ से करे गद्दारी,
सभी हड़पने के चक्कर में जो हाथ किसी के आता.
इसी वजह से ---------------------------
दिन फिरे गे भारत माँ बैठी थी आस लगाये,
भावी पीढ़ी तो है अब नशे में धसती जाये,
सोच बेटो के बारे में माँ का दिल घबराता.
इसी वजह से ---------------------------------
खाना पूर्ति करने को कसमे सभी है खाते,
दाव लगे तो डीजल, पट्रोल, चारा हजम कर जाते,
हर कोई डाका डाल रहा न कोई भी फर्ज निभाता.
इसी वजह से ---------------
चोर उच्चके मौज उडाये मस्ती में डंड पेले,
ईमानदार और स्वाभिमानी लाखों दुखड़े झेले,
कलयुगी गुरु चेलो से तो त्रस्त हुआ विधाता.
राजिंदर "रैना"
भारत माँ के सम्मान में निरंतर हो रहा घाटा,
ReplyDeleteइसी वजह से बहुत दुखी है,आजकल भारत माता.
desh chintan ki achhi rachna hai-isi tarah kalam chalate rahen aap.
Its heart touching and really good
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