मत घबरा पहाड़ों को देख कर,
इंसान जब ठान लेता रास्ते खुद बन जाते है। रैना"
मरने की बात नही करते,
जिंदगी चार दिन की जीने के लिये। रैना"
चाहे खाली मकान छोड़ जा,
उसमें कोई निशान छोड़ जा। रैना"
जब सब का घर एक है,
फिर कौन बड़ा छोटा। रैना"
हमारा दिल जल रहा था,
और वो सुखा रहे थे कपड़े। रैना"
उनके गेसुओं का खंभ न निकला,
अपना दम निकल गया। रैना"
हम पिरोते रह गए लफ्जों की माला,
ख़िताब तो चोरी करने वाले ले गये। रैना"
हम देखा करते थे जिन्हे ख्वाबों में,
वो रूबरू हुए अफ़सोस किसी गैर के साथ। रैना"
अंदाजे बयां कुछ निराले है,
ये शेर नही दिल के छाले है। रैना"
खुद को ज्यादा दुसरो को कम तोलने वाले,
अक्सर जीते जी मर जाते झूठ बोलने वाले। रैना"
यही अन्दाज है अपना,
हर अल्फाज महका देते है। रैना"
मैं लिखता नही करता हूं इबादत,
इबादत में गुस्ताखी नही होती। रैना"