बुझे शोलों को क्यों हवा देता,
मरने वालो को क्यों दुआ देता।
वक्त के साथ बदल जाते सारे,
रैना"को लखते जिगर दगा देता। रैना"
लख्ते जिगर=जिगर का टुकड़ा
मैं किताब हूं बहुत पढ़ लिया आप ने,
अब कुछ दिन लबरेरी बन्द रहेगी। रैना"
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