खुद फ़जीहत हो गये नसीहत देने वाले,
मेरे शहर में ऐसे लोगों को नेता कहते है। रैना"
मुसाफिर रास्ते से भटक गया,
मंजिल किधर है उसे खबर नही। रैना"
कड़वी सच्चाई
खिताब की चाह मत रखना,
क्योकि?????????
ख़िताब तो आजकल चम्मचों को मिलते है ,
बाहुनर को खिताब मुश्किल से मिलता है।रैना"
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