जब भी हम देखते आइना,
खुद ही खुद से शरमा जाते,
गहरी सोचों में जब डूब जाये
तुम फिर याद मुझे आ जाते।
बेवजह का भरम तो मेरा है,
फ़क़त रहमो कर्म तो तेरा है,
झट छा जाती काली बदली,
जब ये गेसू मेरे लहरा जाते।रैना"
खुद ही खुद से शरमा जाते,
गहरी सोचों में जब डूब जाये
तुम फिर याद मुझे आ जाते।
बेवजह का भरम तो मेरा है,
फ़क़त रहमो कर्म तो तेरा है,
झट छा जाती काली बदली,
जब ये गेसू मेरे लहरा जाते।रैना"
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