मैंने हरपल जीना सीखा,
गम को हंस कर पीना सीखा,
उसका सबकुछ उसको देकर,
खुद ही खुद में रहना सीखा। रैना"
दोस्तों के लिए
जिक्र मत कर मौत का,जिंदग़ी की बात कर,
रख ख़ुशी से वास्ता,प्यार की बरसात कर,
नाम की महफ़िल जमे,जाम पी ले राम का,
फ़िक्र चिंता किसलिये,रात को शुभरात कर। रैना"
गम को हंस कर पीना सीखा,
उसका सबकुछ उसको देकर,
खुद ही खुद में रहना सीखा। रैना"
दोस्तों के लिए
जिक्र मत कर मौत का,जिंदग़ी की बात कर,
रख ख़ुशी से वास्ता,प्यार की बरसात कर,
नाम की महफ़िल जमे,जाम पी ले राम का,
फ़िक्र चिंता किसलिये,रात को शुभरात कर। रैना"
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