दोस्तों के लिए खास पेशकश
हमने अब ये जाना जीवन क्या है,
मिट्टी के घर में दीपक जलता है,
घर का आंगन तब तक रोशन रहता,
जब तक सांसों का चक्कर चलता है।
सांसों का चक्कर उसके दम से है,
जिसके ये दम से दीपक जलता है।
तन्हाई,फुरसत में बैठो "रैना"
उसके जलवों के बारे में सोचे,
कैसे पौधा धरती से निकले है,
कैसे फिर बच्चा पेट में पलता है। रैना"
हमने अब ये जाना जीवन क्या है,
मिट्टी के घर में दीपक जलता है,
घर का आंगन तब तक रोशन रहता,
जब तक सांसों का चक्कर चलता है।
सांसों का चक्कर उसके दम से है,
जिसके ये दम से दीपक जलता है।
तन्हाई,फुरसत में बैठो "रैना"
उसके जलवों के बारे में सोचे,
कैसे पौधा धरती से निकले है,
कैसे फिर बच्चा पेट में पलता है। रैना"
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