रूह से रूह की तार जब मिलती है,
तब मिटे गुप अंधेरा कली खिलती है,
महकता बाग़ फिर जिन्दगी हो रोशन,
फिर मजे में हसीं शाम वो ढ़लती है। रैना"
तब मिटे गुप अंधेरा कली खिलती है,
महकता बाग़ फिर जिन्दगी हो रोशन,
फिर मजे में हसीं शाम वो ढ़लती है। रैना"
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