दोस्तों जरा पढ़ कर देखना,
पास दिल के रहने वाले,
खास अपना कहने वाले,
अब तो दूर वो मुझसे जाने लगे है,
अफ़सोस गैर मुझको बताने लगे है।
उनका कुछ भी नही बिगाड़ सकते,
अलबत्ता खुद को ही मिटाने लगे है।
इक ठोकर में घर मेरा तोड़ डाला,
पूरा करने में जिसको जमाने लगे है।
इक मुद्दत से उनको मैंने नही देखा,
फिर भी सपनों में आकर सताने लगे है।
उनको खबर है कुछ हासिल नही होगा,
ये जोखिम फिर भी वो उठाने लगे है।
हाथों की लकीरों में लिखी न कामयाबी,
"रैना"देख हाथों को आंसु बहाने लगे है।रैना"
पास दिल के रहने वाले,
खास अपना कहने वाले,
अब तो दूर वो मुझसे जाने लगे है,
अफ़सोस गैर मुझको बताने लगे है।
उनका कुछ भी नही बिगाड़ सकते,
अलबत्ता खुद को ही मिटाने लगे है।
इक ठोकर में घर मेरा तोड़ डाला,
पूरा करने में जिसको जमाने लगे है।
इक मुद्दत से उनको मैंने नही देखा,
फिर भी सपनों में आकर सताने लगे है।
उनको खबर है कुछ हासिल नही होगा,
ये जोखिम फिर भी वो उठाने लगे है।
हाथों की लकीरों में लिखी न कामयाबी,
"रैना"देख हाथों को आंसु बहाने लगे है।रैना"
No comments:
Post a Comment