Saturday, July 23, 2016

दोस्तों  काफी दिनों बाद आया हूँ
आप का आशीर्वाद की दरकार है।

नसीबा ही रहा ऐसा सहारा मिल नही पाया,
बहुत भटके परेशां से किनारा मिल नही पाया। 
तलाशा है शहर लेकिन मिला अपना नही कोई,
फ़िदा दिल जान कर देते पियारा मिला नहीं पाया।
शिकायत ये रही उससे जला दिन रात दिल का घर,
चमन वीरान क्यों मेरा नजारा मिल नहीं पाया।
भली ये रीत उसकी है खिले जो फूल मुरझाये,
जहाँ जो छोड़ कर जाता दुबारा मिल नहीं पाया।
मेरी हसरत करे शिकवा भला अरमान क्यों टूटे,
खफ़ा दिलदार हमसे है इशारा मिल नहीं पाया।
चले हम छोड़ कर दुनिया यही अरमान ले रैना"
जिसे हम कह सके अपना हमारा मिल नही पाया। रैना"


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