rajindersharmaraina
Sunday, July 24, 2016
इक कड़वा सच
आजादी के लिए जान दी जिन्होंने दुखड़े झेले,
उनके बच्चे दुःख सह रहे,ठेलों पर बेचते केले,
जो थे अंग्रेजों के हमदर्द फोल्डिंग चममचें चेले,
उनको मिली कुर्सियां वो सदा नोटों में हैं खेले। रैना"
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