चाँद ने रात भर ही सोने न दिया,
दर्द होता रहा पर रोने न दिया।
चांदनी से गिला इस बावात रहा,
दाग दिल का हमें क्यों धोने न दिया।
वक़्त की है खता गम आबाद हुये,
चाह रोती रही खुश होने न दिया।
पार लगता सफ़ीना हर हाल सही,
जोश में होश जिसने खोने न दिया।
तोड़ लेते सितारें है सोच यही,
पर उसी ने उंचा सा होने न दिया।
इश्क के बाग़ में हो तैयार वफ़ा,
बीज रैना" किसी ने बोने न दिया। रैना"
दर्द होता रहा पर रोने न दिया।
चांदनी से गिला इस बावात रहा,
दाग दिल का हमें क्यों धोने न दिया।
वक़्त की है खता गम आबाद हुये,
चाह रोती रही खुश होने न दिया।
पार लगता सफ़ीना हर हाल सही,
जोश में होश जिसने खोने न दिया।
तोड़ लेते सितारें है सोच यही,
पर उसी ने उंचा सा होने न दिया।
इश्क के बाग़ में हो तैयार वफ़ा,
बीज रैना" किसी ने बोने न दिया। रैना"
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