मिलते बहुत हैं हाथ मिलाने वाले,
कम ही मिले हैं साथ निभाने वाले।
अब तो भरोसा ही न रहा खुद पे भी,
है मतलबी से यार जमाने वाले।
अब जो नजर आये न दिखे है वैसा,
हैं दांत गज के और चबाने वाले।
मिलती वफ़ा बाज़ार लगे दिल का भी,
होते सफल अब दाम चुकाने वाले।
अन्दाज दिल का क्या न पता लगता,
होते फरेबी अश्क बहाने वाले।
रैना"हुआ बेहाल भला क्यों इतना,
रोशन करेगा मन सांस चलाने वाला। रैना"
कम ही मिले हैं साथ निभाने वाले।
अब तो भरोसा ही न रहा खुद पे भी,
है मतलबी से यार जमाने वाले।
अब जो नजर आये न दिखे है वैसा,
हैं दांत गज के और चबाने वाले।
मिलती वफ़ा बाज़ार लगे दिल का भी,
होते सफल अब दाम चुकाने वाले।
अन्दाज दिल का क्या न पता लगता,
होते फरेबी अश्क बहाने वाले।
रैना"हुआ बेहाल भला क्यों इतना,
रोशन करेगा मन सांस चलाने वाला। रैना"
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