रैना"बड़े ही बेशर्म हैं बराड़ा के मच्छर,
सर्दी में भी जान हथेली पे रखे घूमते रहे। रैना"
तुझ से मिले कैसे बहाना ही नही,
गर है बहाना तो बता दे तू मुझे। रैना"
तू मेरे आस पास पर सामने आता नही ,
अपने घर का रास्ता भी तो बताता नही।
तू खुद तो इक भी पल सोता नही है,
मगर मैं गहरी नींद सोया तू जगाता नही। रैना"
सुप्रभात जी। ....... जय जय मां
सर्दी में भी जान हथेली पे रखे घूमते रहे। रैना"
तुझ से मिले कैसे बहाना ही नही,
गर है बहाना तो बता दे तू मुझे। रैना"
तू मेरे आस पास पर सामने आता नही ,
अपने घर का रास्ता भी तो बताता नही।
तू खुद तो इक भी पल सोता नही है,
मगर मैं गहरी नींद सोया तू जगाता नही। रैना"
सुप्रभात जी। ....... जय जय मां
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