Saturday, February 1, 2014

nmaskar mera

नमस्कार मेरा स्वीकार करे,
ये मशवरा खुद से प्यार करे।
बामुश्किल मिली है फुरसत,
हर हाल में उसका दीदार करे।
सूने मन को बना ले मन्दिर,
नाम की लौ से गुलजार करे।
चले जाये दूर लौटना मुश्किल,
इतना सोच के अपना सुधार करे।
टूटी कश्ती तेज दरिया बहता,
फिर भला कैसे मझदार पार करे।
जब रैना"हो फिर कुछ न हासिल,
दिन में ही कुछ सोच विचार करे।
------------- राजेंदर शर्मा "रैना"    
सुप्रभात जी -------जय जय मां    

No comments:

Post a Comment