मंजिल की खबर फिर भी बेखबर हैं हम,
सब बख्शा उसने फिर भी बेसबर हैं हम।
खुली आँखें फिर भी कुछ नजर न आता,
"रैना"वैसे यूं कहने को तो बानज़र हैं हम। रैना"
सब बख्शा उसने फिर भी बेसबर हैं हम।
खुली आँखें फिर भी कुछ नजर न आता,
"रैना"वैसे यूं कहने को तो बानज़र हैं हम। रैना"
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