बिछुड़ के फिर दोबारा न मिला,
बेशक जायज है उसका गिला।
बेवफा ये सारा शहर ही हो गया,
भूले हम भी क्या वफ़ा का सिला।
शमा से ही इतनी हमदर्दी क्यों है,
शमा से बेकसूर परवाना भी जला।
माली सोचता अब दिन बदलेगे,
गुलशन में जब कोई फूल है खिला।
जीने कि अब कोई तमन्ना न रही,
साकी रैना"को जाम नही जहर पिला। रैना"
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