खैर इस में तो कोई तर्क वितर्क नही है,
दीपेंद्र की नीयत ओ नीति में फर्क नही है।रैना"
यूं ही भटके सारा दिन काम,
मन को फिर भी नही आराम,
गर सकून की हसरत तमन्ना,
कर दो घड़ी मालिक के नाम।रैना"
सुप्रभात जी। ……जय जय मां
दीपेंद्र की नीयत ओ नीति में फर्क नही है।रैना"
यूं ही भटके सारा दिन काम,
मन को फिर भी नही आराम,
गर सकून की हसरत तमन्ना,
कर दो घड़ी मालिक के नाम।रैना"
सुप्रभात जी। ……जय जय मां
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