दुश्मन से दिल लगाया मैंने,
जो मेरा उसको भुलाया मैंने।
मन के घर को साफ न किया,
यूं चेहरा बहुत चमकाया मैंने।
सच से सदा दूरी बना के रखी,
झूठे सपनों को सजाया मैंने।
मुर्ख औरों को मैं कहता रहा,
बेवकूफ़ खुद को ही बनाया मैंने।
शाम ढ़ले तो तब ही याद आये,
बेवजह मन क्यों भटकाया मैंने।
बहुत कुछ पाने की चाहा में ही,
"रैना"सब कुछ तो गवाया मैंने। रैना"
सुप्रभात जी ………जय जय मां
जो मेरा उसको भुलाया मैंने।
मन के घर को साफ न किया,
यूं चेहरा बहुत चमकाया मैंने।
सच से सदा दूरी बना के रखी,
झूठे सपनों को सजाया मैंने।
मुर्ख औरों को मैं कहता रहा,
बेवकूफ़ खुद को ही बनाया मैंने।
शाम ढ़ले तो तब ही याद आये,
बेवजह मन क्यों भटकाया मैंने।
बहुत कुछ पाने की चाहा में ही,
"रैना"सब कुछ तो गवाया मैंने। रैना"
सुप्रभात जी ………जय जय मां
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