दिन भर भटकते रहे शाम ढ़ली तो याद आया,
बेवकत हिसाब लगाने बैठे खोया क्या है पाया।
चारो तरफ गुप घना अन्धेरा कुछ नजर न आये,
आई मुश्किल घड़ी साथ छोड़ गया अपना साया। रैना"
सुप्रभात जी। …………जय जय मां
बेवकत हिसाब लगाने बैठे खोया क्या है पाया।
चारो तरफ गुप घना अन्धेरा कुछ नजर न आये,
आई मुश्किल घड़ी साथ छोड़ गया अपना साया। रैना"
सुप्रभात जी। …………जय जय मां
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