छुप छुप रोता पंछी कोई दर्द न जाने,
रोकता बहुत वो पर कोई भी न माने।
मिलती न उसे खुराक उसके मन की,
मज़बूरी में खा रहा है वो ज़हर के दाने।
इस बात का अफ़सोस मलाल रह गया,
यहां बहुत भटका वहां भी गम हैं उठाने।
रैना"नासमझ सोच कभी तन्हा बैठ के,
पंछी उड़ा साथ छोड़ देगे अपने बेगाने। रैना"
सुप्रभात जी। ............. जय जय मां
कलम का सिपाही हूं,
मेरे हिस्से में भी ????
वही आना है ?????
जो सीमा पे खड़े????
देश भक्त सिपाही के हिस्से में आता है
ये तो पागल है। रैना"
रोकता बहुत वो पर कोई भी न माने।
मिलती न उसे खुराक उसके मन की,
मज़बूरी में खा रहा है वो ज़हर के दाने।
इस बात का अफ़सोस मलाल रह गया,
यहां बहुत भटका वहां भी गम हैं उठाने।
रैना"नासमझ सोच कभी तन्हा बैठ के,
पंछी उड़ा साथ छोड़ देगे अपने बेगाने। रैना"
सुप्रभात जी। ............. जय जय मां
कलम का सिपाही हूं,
मेरे हिस्से में भी ????
वही आना है ?????
जो सीमा पे खड़े????
देश भक्त सिपाही के हिस्से में आता है
ये तो पागल है। रैना"
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